आस्था के गीत बिखरने दो गणतंत्र के अभिनंदन में!
उड़ने दो पंखेरु कबूतर बहुरंगी चितरंगी नील गगन में!!
आसमान देखता है, बदल गये,
मानदंड दशकों के इतिहास में!
क्रतज्ञता के भाव कहां गये,
शहादत शहीदों की अब उपहास में!!
अविरलता पहचान है मेरे भारत की
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प्यासे तट,रेतीले बंजर,सूखी नदियां भारत की !
पनघट पर सो गए भगीरथ,दो जागृती नवागत की!!
अविरलता पहचान है मेरे भारत की !
कथा कला के मू्ल्य जगाती छिड़ शाश्वत की !!
गीत
मौन व्रत ले के बैठे हों सम्वाद जब,
हमको रह रह के ड़सतीं हैं खामोशियाँ,
शब्द चुप हो गए, अर्थ गुम हो गए,
और शापित हैं आकुल सीं अभिव्यक्तियाँ ।
तुम ये कहते हो कुछ भी हुआ ही नहीं,
चलते चलते मग़र ज़िन्दग़ी थम गई,